Saturday, June 25, 2011

धन्यवाद वंदना जी

विनय बिहारी सिंह


वंदना जी की बात सही है। इस बात की पुष्टि आज एक साधु से हुई। उन्होंने कहा- रमता योगी का अर्थ है- वह योगी जो ईश्वर में रमा हो। कोई साधु जब एक जगह पर स्थिर बैठ कर धूनी जलाता है तो कहा जाता है- साधु ने धूनी रमाई। योगी को रमता इसलिए कहा गया है क्योंकि वह सहस्रार चक्र में रमा रहता है। साधु ने कहा- बहता पानी का अर्थ है- करंट वाला पानी। कैसा करंट? ऊर्जा से भरा करंट। बहता पानी का अर्थ है ऊर्जा। रमता योगी का अर्थ है- ईश्वर में रमा हुआ।
साधु ने एक किस्सा सुनाया- एक बार एक साधु ध्यान कर रहे थे। उन्हें गहरी समाधि लग गई। चौबीस घंटे बाद उनकी समाधि छूटी। ठीक उसी समय जिस समय उन्होंने समाधि में प्रवेश किया था। साधु से कहा गया- भगवन, आप तो २४ घंटे समाधि में रहे। उन्होंने कहा- अरे नहीं। मैं तो अभी ध्यान कर रहा था। थोड़ी देर बाद भोजन करूंगा। लोगों ने कहा- नहीं बाबा, आप कल समाधि में चले गए थे और आज आपकी समाधि छूटी है। साधु चकित थे। उन्होंने कहा- मुझे बिल्कुल नहीं लग रहा है। मैं चकित हूं। जो समाधि में रम गया है उसे टाइम और स्पेस का कोई आभास नहीं होता। कोई रिलेटिविटी नहीं। बस ईश्वरानंद। ईश्वर की गोद में बैठे हैं।
इस तरह रमता योगी का अर्थ हुआ- जो ईश्वर में रम गया है।

2 comments:

एम सिंह said...

हमने भी यही सुना है कि जो समाधि में लीन हो जाते हैं उन्‍हें समय और स्‍थान का ज्ञान नहीं रहता.

दुनाली पर देखें
बाप की अदालत में सचिन तेंदुलकर

वन्दना said...

बिल्कुल सही कह रहे है जो ध्यानावस्थित हो गया उसे अपना भान नही रहता मै और तू से परे आनन्दावस्था मे समाहित हो जाता है और ऐसी समाधि की अवस्था किसी विरले को ही नसीब होती है।
आप धन्यवाद देकर मुझे शर्मिन्दा ना करें ये तो सिर्फ़ जो मैने महसूस किया वो आपको बताया था या जो सुन और पढ रखा है वो ही कहा था।