Monday, June 21, 2010

खत्म हो जाएगा सौ साल
में मनुष्य का अस्तित्व ?


विनय बिहारी सिंह


आस्ट्रेलिया के वैग्यानिक फ्रैंक फेनर ने कहा है कि वह समय आ रहा है जब मनुष्य का अस्तित्व रहेगा ही नहीं। इसमें सौ साल लगेंगे। उन्होंने कहा है कि सिर्फ मनुष्य ही नहीं, कई जीव- जंतु भी लुप्त हो जाएंगे। कारण? ग्लोबल वार्मिंग के अलावा वायुमंडल में जो परिवर्तन आ रहे हैं, वे मनुष्य के रहने के अनुकूल नहीं हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे वायुमंडल में जो गैसे हैं, जो रासायनिक और आणविक परिवर्तन होते जा रहे हैं, उनके कारण मनुष्य का जीवन घटता जा रहा है। फ्रैंक फेनर कोई साधारण वैग्यानिक नहीं हैं। उन्होंने ने ही स्माल पाक्स रोग के लिए कारगर टीके का अविष्कार किया था। अब चेचक से किसी का चेहरा बदरूप नहीं होता। वरना एक जमाने में चेचक से बदरूप हुए चेहरे खूब दिखाई देते थे। पूरे चेहरे पर चेचक के गड्ढे हो जाते थे। फ्रैंक फेनर के अविष्कार के कारण मनुष्य आज ऐसे खतरनाक रोग से मुक्त हो गया है। एक तो ज्यादातर लोग यूं ही लापरवाही से जीवनयापन कर रहे हैं। किसी ने सिगरेट आफर की तो पी लिया। किसी ने शराब आफर की तो वह भी पी लिया। खराब तेल या घी में तले समोसे दिए तो खा लिया। सतर्कता नहीं है। यह समोसा पेट के भीतर जा कर कितना गड़बड़ करेगा, इसकी चिंता नहीं है। ऐसे खाद्य पदार्थ पेट में जा कर एसिड की तरह जलन तो पैदा नहीं करते। ये धीमा जहर होते हैं। खूब तली- भुनी चीजें पाचन शक्ति को नष्ट करती हैं। आपके पाचन तंत्र को डिस्टर्ब करके छोड़ देती हैं। अगर यह डिस्टर्बेंस बार- बार होता रहेगा तो हो सकता है आपका पाचन तंत्र एकदम से चौपट हो जाए। तब जो पूड़ी (इसे बंगाल में लूची कहते हैं) या कचौड़ी या समोसे या ब्रेड पकौड़ा
या मालपूआ आप कभी- कभार खाते थे, वह भी खाना बंद हो जाएगा। एक डायटीशियन का कहना था कि आप महीने में एक दिन पूड़ी, हलवा या कचौड़ी या समोसा या पराठा खाएं तो चलेगा। लेकिन आए दिन ये चीजें खाएंगे तो कोलेस्टेराल और फैट की मात्रा घातक ढंग से बढ़ सकती है। अब आप कहेंगे कि जब सौ साल में मनुष्य ही नहीं रहेगा तो इस तरह के परहेज का फायदा क्या? तो इसका जवाब है- फायदा है। जब तक आप जीवित हैं, आप स्वस्थ तो रहेंगे। ईश्वर भक्ति के लिए स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन होना जरूरी है। लेकिन अगर आप शारिक रूप से स्वस्थ नहीं है तो भी ईश्वर से प्रेम करना आप क्यों छोड़ेंगे? भगवान के प्रेम के बिना जीवन अधूरा और अशांत है।

1 comment:

माधव said...

बस सौ साल ही बचे है