Tuesday, August 18, 2009

क्या भगवान के लिए आपके पास समय नहीं?

विनय बिहारी सिंह

कई लोग कहते हैं कि भगवान का ध्यान करने के लिए उन्हें समय नहीं मिलता। वे दिल से चाहते तो हैं कि किसी मंदिर में जाएं या कम से कम घर पर ही राम, राम का जप करें, लेकिन समय का अभाव है। यह विचित्र सी बात है। विचित्र इसलिए क्योंकि अगर भगवान नहीं तो हम भी नहीं। हम दुनिया का प्रपंच करने यहां नहीं आते। इसलिए भी नहीं कि सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार को लेकर ही दिन रात सोचें। हां, परिवार की जिम्मेदारी से हमें भागना नहीं है। परिवार की सुख- शांति के लिए हमें खूब परिश्रम करना चाहिए। लेकिन सब कुछ हमारा परिवार ही नहीं है। उसके ऊपर ईश्वर भी हैं। चूंकि भगवान को याद किए बिना भी हमारा काम चल रहा है, इसलिए हमें उनका ध्यान जरूरी नहीं लगता। लगता है कि भगवान तो यूं ही खुश है या वह तो तटस्थ है। हम याद करें या न करें, उसे क्या फर्क पड़ता है। हम टीवी देखने लगते हैं या अखबार या पत्रिका पढ़ने लगते हैं या गप हांकने लगते हैं। इसके लिए हमारे पास जरूर समय होता है। लेकिन पांच या दस मिनट शांति से बैठ कर दुनिया जहान को भूल कर सिर्फ और सिर्फ भगवान में डूबना कई लोगों को अच्छा नहीं लगता। वे तो किसी मंदिर में भी जाते हैं तो झट से जल चढ़ाया, फूल और माला चढ़ाई औऱ बस हो गया। मंदिर से बाहर निकलते ही दिमाग में दुनिया भर का प्रपंच घूमना शुरू हो जाता है। यह पूजा किस काम की। परमहंस योगानंद जी का लिखा एक बहुत प्रसिद्ध गीत है। वे भगवान को संबोधित करते हुए कहते हैं-
तू ध्रुवतारा मम जीवन का।
भव सागर घोर अंधेरा और तारे डूब गए
फिर भी राह दिख रही, मुझे तेरी दया से।

आप कितने भी दुखी, निराश और परेशान हों। भगवान एक सुंदर सा रास्ता आपके लिए जरूर रखते हैं। वे सारे रास्ते बंद नहीं रखते। लेकिन एक शर्त है। भगवान के पास सब कुछ है। लेकिन फिर भी वे अपनी संतानों का प्यार चाहते हैं। यानी हम लोगों का प्यार उन्हें चाहिए होता है। अगर हम उन्हें प्यार करेंगे तो वे भी हमें कई गुना प्यार करेंगे। कितना आसान है। हमें सिर्फ भगवान को प्यार करना है। दिल से। क्या हमारे दिल में अपने सृजनकर्ता के लिए प्यार नहीं है? अगर नहीं तो हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अगर हमारे दिल में भगवान के प्रति थोड़ा भी प्यार है तो हमारा जीवन सुखी है। हम भगवान के हैं और भगवान हमारे हैं। भगवान खुद ही कहते हैं- हम भक्तन के भक्त हमारे। फिर तो दुनिया की सारी चिंताएं, सारा बोझ एक पल में खत्म हो जाएगा। हम मुक्त आकाश में उड़ते पंछी से मुक्त होंगे। संसार का काम करेंगे लेकिन मन भगवान के पास रहेगा। सोचिए कितना सुखी होंगे हम। वही हमारे परिवार को देखता है, उसका भरण पोषण करता है। लेकिन हम सोचते हैं कि हम्हीं सब कुछ करते हैं।

4 comments:

Ram said...

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rakesh ravi said...

dear vinay bihari ji
i am writing in english because i am not able to type in devnaagri in this comment box, if there is a solution then let me know, please.

what you wrote toched my heart. i am doing all short of thing but struggle to take out time for any spiritual practice. i will try not to waste time and be close to god in my heart.
thank you
rakesh

vinay bihari singh said...

dear rakesh ravi ji,
just free 10 minutes in the morning and evening and pray to god with deep devotion- god, i am thy child. please help me to love you. you are my father, you are my mother. please guide me.
please dont think that god is not listening you. he is omnipresent. he listen every word we speak.

vinay bihari singh said...

ram bhai
thanks for this interesting sugestion. i have dne it