Thursday, April 21, 2011

सारी अच्छी वस्तुएं भगवान के यहां से आती हैं


विनय बिहारी सिंह



हमारे जीवन में जो कुछ भी अच्छा घटित होता है, वह भगवान के यहां से आता है। और जो भी खराब घटित होता है, उसके लिए हम जिम्मेदार हैं। ऐसा क्यों? भगवान हमेशा अच्छी वस्तुएं देने को तत्पर रहते हैं। उनके यहां कुछ भी खराब या बुरा नहीं है। सब कुछ निर्मल है, प्रेम से ओतप्रोत। इसलिए अगर हमें कोई सुखद क्षण मिलता है तो वह भगवान देते हैं। वे नहीं चाहते कि इस संसार में हमेशा हम अपने कर्मों के कारण दुख पाते रहें। वे बीच- बीच में हमें प्यार करते हैं। फिर छुप जाते हैं। हम अपने चंचल मन के कारण उन्हें महसूस नहीं कर पाते। ऋषियों ने कहा है कि भगवान सर्वत्र हैं, सर्वव्यापी और सर्वग्याता हैं। वे आपके हृदय और मन के गहनतर कोने में भी हैं। हम क्या सोचते हैं, वे यह जानते हैं। भगवान से हमारी कोई भी बात छुपी नहीं रह सकती। बुरे से बुरे आदमी को भी भगवान सुख के क्षण देते हैं ताकि वह सुधर जाए। अगर कोई फिर भी नहीं सुधरता तो वे कहते हैं- ठीक है अपने कर्मों का फल भोगो। तब शायद तुम मुझे याद करोगे। हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। अंग्रेजी में कहावत है- लव बिगेट्स लव। प्रेम ही प्रेम को आकर्षित कर सकता है। सबसे उच्चकोटि का प्रेम है- भगवान से प्रेम। अगर उनसे प्रेम किया जाए तो हमारा रोम- रोम आनंद से भर जाएगा। प्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति का नाम है ईश्वर। उनसे प्रेम कर हमारा रोम-रोम तृप्त हो जाता है। यह ऐसा प्रेम है कि आप इसके नशे में हमेशा चूर रहेंगे और दिन- रात आपकी आंखों के सामने भगवान ही छाए रहेंगे। गीता में तो भगवान कृष्ण ने अर्जुन से स्पष्ट शब्दों में कहा है- मुझसे प्रेम कर, मुझे नमस्कार कर, मेरे लिए सारे काम कर। इस प्रकार की भक्ति से तुम्हारा उद्धार हो जाएगा। तब ऐसा प्रेम कौन नहीं चाहेगा। सभी उच्चकोटि के साधक, ईश्वर के प्रेम से सराबोर रहते हैं।

1 comment:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सुंदर सार्थक पावन विचार..... अच्छा लगा पढ़कर