Saturday, May 29, 2010


ईश्वर को समर्पित

मित्रों,
साध्वी इंग्रिड हेंजलर ने इस ब्लाग के लिए एक बहुत ही सुंदर कविता भेजी है। उनकी कविता ईश्वर के प्रेम से सराबोर है।
यह कविता पहले अंग्रेजी में और फिर अनूदित रूप में हिंदी में आपके सामने है। मुझे यह कविता इतनी सुंदर लगी कि इसे आपको पढ़वाने से रोक नहीं सका। हम ईश्वर के रास्ते में सांसारिक आकर्षणों में खो जाते हैं और भूल जाते हैं कि हम ईश्वर की तरफ यात्रा कर रहे थे। रंग- विरंगे रिश्ते, चीजें और अन्यान्य आकर्षण हमें नचाते रहते हैं। आप सभी जानते हैं कि इंग्रिड ईश्वर प्रेम के अलावा कुछ जानती ही नहीं। उनका रोम- रोम, उनका मन, उनकी आत्मा और उनका संपूर्ण अस्तित्व ईश्वरमय है। उनकी सांसें ईश्वर को समर्पित हैं। सबसे पहले अंग्रेजी में यह कविता, फिर उसके नीचे हिंदी में।

Lost once more

Ingrid Henzler


lost once more

in the beauty

of leaves

in golden trees

in the infinite sky


Incarnations

I roamed

I searched

Divine love

and almost

reached

my goal


Dying

I surrender

I dissolve

in the water

becoming one

with You

and all


So much love

that it hurts


It hurts

like needles

it burns

like a fire

but

I have

no choice

I have given

myself

to love

खो गई एक बार फिर

इंग्रिड हेंजलर


खो गई एक बार फिर
पत्तियों के सौंदर्य में
सुनहरे पेड़ों में
अनंत आकाश में

जन्म जन्मांतर से
घूम रही हूं मैं
खोज रही हूं मैं
दिव्य प्रेम
और लगभग
पहुंच जाती हूं
अपने लक्ष्य तक

मर रही हूं
शरण में हूं तुम्हारे
घुल जाती हूं
पानी में
एक हो जाती हूं
तुम्हारे साथ
और बस

इतना प्रेम
कि देता है यह कष्ट

देता है यह कष्ट
सुई की तरह
जलाता है यह
आग की तरह
लेकिन
मेरे पास
नहीं है कोई विकल्प

मैंने सौंप दिया है
खुद को
प्यार के हवाले।।

(अंग्रेजी से अनुवाद- विनय बिहारी सिंह)


2 comments:

nilesh mathur said...

वाह! बहुत अच्छा लगा पढ़ कर, बहुत ही सुन्दर कविता है, धन्यवाद्!

वन्दना said...

gazab ki prastuti..........yahi to ishwariya prem ka saar hai........ekakar ho jana.........apne astitiva ko vilin kar dena.
pls read ---http://redrose-vandana.blogspot.com