Wednesday, April 28, 2010

एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति

विनय बिहारी सिंह

आज आनंदमयी मां की एक किताब पढ़ रहा था। उसमें भक्तों ने उनसे प्रश्न पूछा है और उन्होंने जवाब दिया है। प्रश्नोत्तर शैली में प्रकाशित यह पुस्तक अत्यंत रोचक और गहरी जानकारी देने वाली है। एक व्यक्ति ने मां से प्रश्न किया है- ईश्वर कैसे मिलेंगे? मां कहती हैं- ईश्वर तो मिले हुए हैं, आपको उनका अनुभव इसलिए नहीं है क्योंकि आपकी आंखें माया से ढंकी हुई हैं। परदा हटेगा तो ईश्वर का सच्चिदानंद रूप दिखाई दे जाएगा। भक्त ने पूछा है- यह परदा कैसे हटेगा? मां ने उत्तर दिया है- ईश्वर की शरण में जाने से। अहं का नाश करने से। भक्त ने पूछा है- अहं का नाश कैसे होगा? मां ने उत्तर दिया है- ईश्वर की गहरी भक्ति से। भक्त ने पूछा है- भक्ति कैसे आएगी? मां ने जवाब दिया है- इतना कष्ट पा रहे हो। क्या तब भी समझ में नहीं आ रहा है कि तुम रास्ता भटक गए हो? जो रास्ता माया की तरफ जाता है, भोग की तरफ जाता है उसमें कष्ट ही कष्ट है। विषय वासना यानी विष। स्लो प्वायजन। जिस आनंद को तुम ढूंढ़ रहे हो, वह सिर्फ और सिर्फ भगवान में मिलेगा। मनुष्य सच्चा आनंद चाहता है। लेकिन आनंद की ललक में माया के जाल में फंस जाता है और छटपटाता है। फिर छूटता है और फिर माया के किसी अन्य रूप में फंसता है। फिर छटपटाने लगता है। यह काम बार- बार होता है। मंद बुद्धि व्यक्ति तब भी नहीं समझता। लेकिन चालाक व्यक्ति समझ जाता है कि यह रास्ता गलत है। असली रास्ता वही है जो भगवान की तरफ जाता है। बस वह ईश्वरोन्मुख हो जाता है। दिन रात भगवान, भगवान करता रहता है। अंत में वह मुक्त हो जाता है। एक ही चीज सच्ची है- ईश्वर। कहा भी गया है- एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति। मनुष्य बंधन में है। अपने ही बनाए बंधन में। सिगरेट पीने वालों के बारे में मां ने कहा है- तुम सिगरेट नहीं पी रहे हो। सिगरेट ही तुम्हें पी रही है। तुम अगर सिगरेट पी रहे होते तो जब चाहे तब छोड़ सकते थे। लेकिन तुम छोड़ नहीं पा रहे हो। इसका अर्थ है सिगरेट तुम्हें पी रही है। इसीलिए नहीं छूट रही है। उन्होंने जीवन को संयमित करने की सलाह दी है। कहा है कि रात में जल्दी सोना चाहिए और सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जगना चाहिए। इससे शरीर तो स्वस्थ रहता ही है। साधना भी अच्छी होती है। जिसे कोई साधना नहीं मालूम वह राम नाम का ही जाप करे। यह जाप बहुत कारगर है।

1 comment:

वन्दना said...

aanandmayi maa ke divya updesh padhwakar aapne ek bahut hi badhiya kaam kiya hai..........aur jo divya gyan unhone diya hai yadi itna hiinsaan apn ebheetar utaar le to jeete ji mukt ho jaaye.
kripaya us kitaab ka naam aur prakashak ka naam batane ka kasht karein.