Friday, April 2, 2010


गुड फ्राइडे और ईस्टर


विनय बिहारी सिंह


आज गुड फ्राइडे है। यानी जीसस क्राइस्ट इसी दिन सूली पर चढ़ाए गए थे। उनका अपराध क्या था? उन्होंने कहा था- मैं ईश्वर का पुत्र हूं। उन्होंने सच ही तो कहा था। हम सभी ईश्वर के पुत्र हैं। लेकिन उस समय के पुजारियों के मन में भय समा गया। ये पुजारी तो लोगों के भय और श्रद्धा का लाभ उठा रहे थे। लेकिन जीसस ने लोगों की मुक्ति का द्वार खोल दिया। कहा- हम ईश्वर की संतान हैं। पहले तुम ईश्वर को चाहो, बाकी चीजें अपने आप तुम्हें मिल जाएंगी। उस जमाने के पुजारी डरे। उनका तो धंधा ही नष्ट हो जाएगा। जीसस पर उस जमाने के प्रधान पुजारी ने धर्म विरोधी बयान देने का आरोप लगाया। राजा से उसने कहा- यह आदमी खुद को ईश्वर का पुत्र कहता है। यह अपराध है। इसी आरोप में जीसस जैसे ईश्वरतुल्य व्यक्ति को सूली पर चढ़ा दिया गया। जीसस को धोखा दिया उन्हीं के शिष्य जुडास इस्कैरिअट ने। पुजारियों ने जुडास को घूस दे दिया। उस जमाने में जुडास को घूस के रूप में चांदी के ३० सिक्के मिले थे। जीसस के एक अन्य शिष्य पीटर ने भी तब उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया। हालांकि जीसस क्राइस्ट जानते थे कि पीटर गाढ़े समय में उन्हें पहचानने से इंकार कर देगा। उन्होंने पहले ही पीटर से कहा था- पीटर तुम मेरे प्रिय हो। लेकिन एक समय ऐसा आएगा कि तुम मुझे पहचानने से तीन बार इंकार करोगे। पीटर ने कहा- नहीं। यह हो ही नहीं सकता। मैं आपके साथ हूं। लेकिन जब जीसस को सूली पर चढ़ाया जाने वाला था और राजा के प्रतिनिधियों ने पीटर से पूछा- तुम जीसस को जानते हो? पीटर ने कहा नहीं। उसने तीन बार इंकार किया और जीसस की बात सच निकली। जीसस जिस सूली पर चढ़ाए गए उसे वे अपने कंधे पर ले कर गए। सूली पर चढ़ाए जाने के बाद जब उन्होंने अपना देह त्याग दिया तो उनका शिष्य जोसेफ आया और उनके शरीर को लेने का आवेदन किया। उसे जीसस की देह मिल गई। उसने उनकी देह में शरीर सुरक्षित रखने वाले मसालों का लेप किया। फिर उसे चादर से ढक दिया और उन्हें जमीन में समाधि दे दी। समाधि के मुंह पर एक बड़ा सा पत्थर रख दिया और अपने घर आ गया। जिस दिन जीसस को सूली पर चढाया गया वह शुक्रवार का दिन था। उसके एक दिन बाद यानी रविवार को जीसस क्राइस्ट जीवित होकर समाधि से निकल आए। जिस दिन वे समाधि से निकल कर बाहर आए उसे ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। यह ईसाई समुदाय के लिए परम पवित्र दिन होता है। जीसस क्राइस्ट जैसे ईश्वरतु्ल्य संत को याद कर मन आनंद से भर जाता है।

2 comments:

vedvyathit said...

kya shesh prani ishvr ke putr nhi hain kya ve ishvr ke dushmn hain ydi nhi ti fir kevl is bat ke prchar ka kya mtlb hai ki sb us pr vishvash lao kya ishvr kisi ek putr ko ho duniya ki thekedari de skta hai ydi aisa hai to ya to ishvr glt hai ya us ka thekedar putr glt hai
dr.ved vyathit

आशुतोष दुबे said...

aap sahi kah rahe hai.
हिन्दीकुंज