Monday, April 5, 2010

युवकों को हो रहा है ब्रेन स्ट्रोक


विनय बिहारी सिंह


आल इंडिया इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि ब्रेन स्ट्रोक के जितने भी मामले वहां आ रहे हैं उसका एक चौथाई हिस्सा युवकों या युवतियों का है। हर महीने वहां ब्रेन स्ट्रोक के २५० से ३०० मामले आते हैं। इनमें ७० से ७५ लोग २८ से ४० साल उम्र के बीच के लोग होते हैं। इसका कारण बताया गया है कि एक तो आजकल युवकों में सिगरेट और शराब पीने की लत बढ़ी है। दूसरे पढ़ाई या नौकरी में जो तनाव सामने आते हैं उसका सलीके से हल न कर पाने से वे तनाव में आ जाते हैं। कुछ अन्य सर्वे समय समय पर होते रहे हैं। उनमें भी इन दिनों कामकाज की जगहों पर तनाव का माहौल पाया गया है। कुछ दफ्तरों का माहौल ऐसा है कि वहां पदोन्नति की होड़ में अजीब तरह की दौड़ सामने आती है। एक- दूसरे की चुगली और ईमानदार लोगों की अनदेखी। काम न करके चापलूसी करने की परंपरा और चापलूसी को ही बढ़ावा। इसमें ईमानदार लोग पिस रहे हैं। कहीं आत्महत्या तो कहीं रोजमर्रा का बढ़ता तनाव। ऊपर से अनियमित खानपान और रहन- सहन। खून की धमनियों की दीवारें धीरे- धीरे मोटी होती जाती हैं। इस तरह खून में आक्सीजन की कमी होती जाती है। जब मस्तिष्क में पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचता तो ब्रेन हेमरेज या स्ट्रोक होता है। इसको स्ट्रोक ही कहा जाता है। लेकिन कई जगह हिंदी में ब्रेन स्ट्रोक भी लिखा जाता है। देर रात सोने और सोने से पहले अत्यधिक शराब पीने और गरिष्ठ भोजन करने और लगातार खानपान में गड़बड़ी से भी स्ट्रोक होता है। लेकिन अब देखा यह जा रहा है कि अत्यधिक तनाव से लोग अनियमित खानपान करते हैं। या उनका दिमाग लगातार तनाव में रहने से उच्च रक्तचाप और सुगर जैसी बीमारियां होती हैं। फिर धीरे- धीरे स्ट्रोक की स्थितियां बनती हैं। आप पूछ सकते हैं कि तनाव से रक्त की धमनियों की दीवारें कैसे मोटी हो सकती हैं? चिकित्सकों ने पाया है कि अत्यधिक तनाव से दिमाग की नसों में खून के थक्के भी जम जाते हैं और स्ट्रोक होता है।
ऐसे में हमें अपने ऋषियों की याद आती है। उन्होंने हमें योग, ध्यान और ईश्वर पर पूर्ण भरोसा करने को कहा है। वे कह गए हैं कि आप तनाव के बदले मन में ईश्वर के प्रति प्रेम का अनुभव करना सीखिए। दिन में कुछ बार अगर आपने ऐसा दो- दो मिनट के लिए भी इस तरह का संक्षिप्त ध्यान करना शुरू कर दिया तो तनाव धीरे- धीरे कम होता जाएगा। यह सच है कि तनाव हर व्यक्ति का पीछा कर रहा है। लेकिन कौन इसे जीत रहा है, यह मानसिक तैयारी पर निर्भर है।


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