Saturday, February 6, 2010

कहीं इस आदत के शिकार आप भी तो नहीं

विनय बिहारी सिंह

पिछले वृहस्पतिवार को इंटीग्रेटेड आंको थिरैपी के एक कार्यक्रम में जाने का मौका मिला। वहां एलौपैथिक डाक्टरों से लेकर होमियोपैथ और आयुर्वेद तक के डाक्टरों ने एक स्वर में यही कहा कि सिगरेट और गुटका तो जहर हैं ही, सुरती और जर्दा भी बेहद खतरनाक हैं। तंबाकू कैंसर को जन्म देता है। इससे पीड़ित मनुष्य दर्द से जब छटपटाता है तो हृदय कांप जाता है। इसके एक दिन पहले कोलकाता के आमरी अस्पताल के डाक्टर केएम मंदाना और निजी शल्य चिकित्सक डाक्टर विकास अगरवाल से भेंट हुई। इन लोगों ने कहा कि हमने बार- बार कहा है कि सिगरेट और गुटका जहर है। लेकिन हमारे मना करने के बावजूद लोग धड़ल्ले से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। बच्चों तक को गुटका खाने की लत लग गई है। गांवों में महिलाएं भी गुटका खा रही हैं। कोई रोकने वाला नहीं है। समझाने वाला नहीं है। इससे दांत तो गंदे होते ही हैं, स्वास्थ्य भी चौपट होता है। उन्होंने बताया कि किस तर ३५ साल के एक नौजवान व्यक्ति की जीभ काट देनी पड़ी क्योंकि वह २० साल से तंबाकू का सेवन कर रहा था और उसकी जीभ का पिछला हिस्सा पूरी तरह कैंसर की चपेट में था। उन्होंने ऐसे ही कई उदाहरण दिए जो हृदय विदारक हैं। तब सवाल उठता है कि लोग क्यों ऐसी जानलेवा आदतों के गुलाम हो गए हैं। सभी डाक्टरों का कहना है कि ऐसे लोगों में इच्छा शक्ति नहीं होती। वे समझते हैं कि सिगरेट या गुटका उनसे ज्यादा बलवान है। वे उनके आगे हार मान लेते हैं। जो लोग दृढ़ता के साथ एक बार ठान लेते हैं कि वे अब तंबाकू की ओर देखेंगे भी नहीं, वे तो इसे छोड़ने में सफल हो जाते हैं लेकिन जो शुरू में तो दृढ़ता के साथ प्रण करते हैं लेकिन दो- चार दिन बाद कमजोर पड़ जाते हैं, उनका सिगरेट या गुटका पीछा नहीं छोड़ता। प्रकृति का नियम है कि हमला हमेशा कमजोर पर ही पहले होता है। अगर आपका शरीर कमजोर है तो बीमारी सबसे पहले आपको ही घेरेगी। अगर आपका मन कमजोर है तो सबसे पहले गुस्सा, तनाव, घबराहट, डर और चिंता आपको ही सबसे पहले दबोचेंगे। ऋषियों ने कहा है कि ईश्वर पर भरोसा कीजिए और उसे साथ लेकर अपने मन को दृढ़ करते रहिए। फिर आपको कोई चिंता नहीं। मन और शरीर को पुष्ट रखना बहुत जरूरी है। आप कोई भी काम इन्हीं दोनों की मदद से करते हैं। इसीलिए आत्ममंथन कर देखना चाहिए कि कहीं हमारा मन या शरीर कमजोर तो नहीं है। अगर है तो उसे दूर करने के उपाय करना चाहिए। अन्यथा कमजोरी भी हमारे मन में स्थाई घऱ बना लेगी। तब आप उसे बार- बार भगाएंगे और वह बार- बार आपके भीतर लौट आएगी। ऐसा न हो इसके लिए दृढ़ बन कर डटे रहिए।

1 comment:

Rekhaa Prahalad said...

उत्तम विचार, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना बहुत ही आवश्यक है इस तनाव भरे युग मे. बहुत आभार!