Friday, July 31, 2009

साइंस के दो अद्भुत प्रयोग और अध्यात्म

विनय बिहारी सिंह

वैग्यानिकों ने दो अद्भुत प्रयोग किए हैं। यह प्रयोग यूरोप में हुआ है। उन्होंने मच्छरों में मलेरिया नाशक दवाएं भर दीं और उन्हें एक खास जालीदार घेरे में छोड़ दिया जहां मलेरिया के मरीज सोए हुए थे। यह एक अद्भुत प्रयोग था। मच्छर इन मरीजों को काटते थे और मरीजों के खून में मलेरिया मारक दवाएं चली जाती थीं। इन मच्छरों को फ्लाइंग इंजेक्शन कहा जा रहा है। जो मच्छर मलेरिया फैलाते हैं, उन्हीं का प्रयोग मलेरिया का नाश करने के लिए किया जा रहा है। वैग्यानिकों का कहना है कि इन मच्छरों को तब से मलेरिया रोधक या मारक दवाओं पर जिंदा रखा जाता है जबसे वे अंडे के भीतर होते हैं। नतीजा यह है कि वे मलरिया नाशक मच्छर के रूप में बड़े होते हैं औऱ जब वे मलेरिया से पीडित रोगी को काटते हैं तो वह भला चंगा हो जाता है। दूसरा प्रयोग किया गया है मनुष्य के पेशाब या मूत्र को लेकर। मूत्र से बिजली पैदा की जा रही है। एक लीटर मूत्र से १ किलोवाट बिजली पैदा हो रही है। लोगों को एक जलविहीन पेशाबखाने में पेशाब करने को कहा जाता है। जल न होने पर भी इस पेशाबखाने में दुर्गंध नहीं निकलती क्योंकि दुर्गंधनाशक व्यवस्था पहले ही कर दी गई है। मनुष्य के मूत्र में इतनी ऊर्जा है कि उससे बिजली पैदा हो जाती है। और हम आलस में पड़े रहते हैं। हमारे धर्म शास्त्रों ने ठीक ही कहा है कि मनुष्य के एक सेल में अपार ऊर्जा है। बस उसे ध्यान के द्वारा जाग्रत कर देने की जरूरत है। ध्यान मन या माइंड को केंद्रित करके ही होगा। यही कई लोगों को बहुत मुश्किल लगता है। जबकि अभ्यास से यह साधा जा सकता है। यह अभ्यास दो मिनट से शुरू करके बढ़ाते जाने से आप छह घंटे, आठ घंटे लगातार ध्यान में बैठ सकते हैं। लेकिन चैन से बैठ कर ध्यान करना होगा। मन अगर बेचैन है तो ध्यान मुश्किल हो जाएगा। बेचैन यानी अंग्रेजी में जिसे रेस्टलेस कहते हैं। रेस्टलेस को रेस्टफुल करना होगा।

2 comments:

Arkjesh said...

बहुत मजेदार और महत्वपूर्ण प्रयोग बताये आपने !

परमजीत बाली said...

रोचक जानकारी है।