Thursday, March 18, 2010

जीसस क्राइस्ट को याद करते हुए




विनय बिहारी सिंह



जीसस क्राइस्ट ने कहा है- सीक ये द किंगडम आफ गाड। रेस्ट थिंग्स विल बी एडेड अन टू यू। बाइबिल की ये पंक्तियां पढ़ते हुए सुख मिलता है। यानी पहले भगवान की चाहत करो। जब वे मिल जाएंगे तो बाकी सारी चीजें तुम्हें मिल जाएंगी। तुम मालामाल हो जाओगे। सारे धर्म ग्रंथों में यही बातें हैं। आप पूछ सकते हैं कि आज जीसस की बात क्यों? तो मित्रों पता नहीं क्यों आज सुबह से जीसस क्राइस्ट याद आ रहे हैं। उनका सूली पर चढना और जो उन्हें सूली पर चढ़ा रहे हैं उनके प्रति उनके मन में दया भाव। वे भगवान से कहते हैं- हे ईश्वर इन्हें माफ कर दो क्योंकि इन्हें पता नहीं है कि ये क्या कर रहे हैं। हां, अब याद आया। कल मैंने जीसस क्राइस्ट का एक अत्यंत मनोहारी चित्र देखा था। शायद इसीलिए सुबह से ही उनकी कही ये पंक्तियां याद आ रही हैं। उस चित्र में जीसस करुणा की मूर्ति लग रहे हैं। मैंने वह चित्र बहुत गौर से देखा। मैं ईसाई नहीं हूं। लेकिन जबसे पढ़ा है कि जीसस भारत आए थे और पुरी में कुछ ब्राह्मणों से उन्होंने वेद और पुराण की जानकारी पाई, तबसे उनमें उत्सुकता बढ़ती गई। यदि उनकी रुचि वेद- पुराणों में थी तो मेरी रुचि जीसस में क्यों नहीं हो सकती? इसीलिए जीसस अपने लगते हैं। बाइबिल में अनेक बातें हमारे धर्म ग्रंथों से मिलती जुलती हैं। परमहंस योगानंद जी के गुरु स्वामी श्री युक्तेश्वर जी ने बाइबिल और हिंदू धर्मग्रंथों में साम्य पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तक लिखी है जो आज भी उपलब्ध है। इस पुस्तक का नाम है कैवल्य दर्शनम। इसे योगदा सत्संग सोसाइटी आफ इंडिया ने प्रकाशित किया है। इस पुस्तक के पढ़ने के बाद जीसस हमें अपने और करीब लगने लगते हैं। लेकिन इस पुस्तक में जीसस के भारत आने की बात नहीं लिखी है। मैंने जीसस के भारत आने की बात एक यूरोपीय लेखक की किताब में और स्वामी अभेदानंद की पुस्तक माई जर्नी टू तिब्बत में पढ़ी है।