Monday, January 23, 2012

मेरे प्रभु

विनय बिहारी सिंह



अपनी छाती से
एक बार लगा लो
हे प्रभु
महसूस करना चाहता हूं
मैं आपकी उपस्थिति

जानता हूं
आप हैं इंद्रियातीत
और मैं इंद्रियोन्मुखी
तो राख हो जाएं
मेरी इंद्रियां

पर मुझे प्रेम करो
मेरे प्रभु
मुझे लगा लो
अपनी शांतिदायक, आह्लादकारी
सूक्ष्म छाती से।।

1 comment:

वन्दना said...

विनय बिहारी जी आज तो आपने मेरे भावों को शब्द दे दिये हैं ………एक यही चाहत है जो जीने नही दे रही ।