Monday, January 2, 2012

नए साल पर पूजा के लिए लंबी लाइन

विनय बिहारी सिंह




दक्षिणेश्वर में मां काली के मंदिर में पहली जनवरी २०१२ को पूजा चढ़ाने के लिए बहुत लंबी लाइन लगी थी। लंबी लाइन हर साल होती है लेकिन इस बार लाइन अपेक्षाकृत ज्यादा लंबी थी। तब भी लोग धैर्य से लाइन में खड़े थे। हाथों में पूजा की सामग्री। कुछ लोगों के साथ छोटे- छोटे बच्चे भी थे। यह वही मंदिर है जहां विख्यात संत रामकृष्ण परमहंस को मां काली ने दर्शन दिया था। और रामकृष्ण परमहंस जहां अनेक वर्षों तक रहे और यहीं पर दीक्षा ग्रहण की। उनके वेदांत गुरु तोतापुरी जी थे तो तंत्र की गुरु थीं साध्वी ब्राह्मणी। मुझे लंबी लाइन देख कर लगा कि मां काली इतने धैर्य के साथ खड़े लोगों के ऊपर आशीर्वाद की वर्षा कर रही हैं। भले ही इससे लोग अनजान हैं। अनेक लोगों को तो पूजा करने का मौका शाम को मिला होगा। भले ही वे सुबह से लाइन में खड़े थे। लेकिन साल के पहले दिन मां काली के पैर पर फूल चढ़ाने का उनका उत्साह धीमा नहीं पड़ा था। मैं योगदा सत्संग सोसाइटी आफ इंडिया के आश्रम में जा रहा था तो यह दृश्य देखा। योगदा आश्रम में पहली जनवरी को छह घंटे का लंबा ध्यान था। बहुत ही सुखद और न भूलने वाला सामूहिक ध्यान। इसे योगदा मठ कहते हैं। लेकिन मैं आश्रम इसलिए कहता हूं क्योंकि यही जबान पर चढ़ गया है। यहीं हर रविवार को भोजन करता हूं। शाम की चाय भी पीता हूं। पूरे दिन रहने पर बहुत सुख मिलता है। संयोग से इस बार रविवार पहली जनवरी को ही पड़ा। अगर रविवार नहीं भी होता और अगर मैं कोलकाता में होता तो इस आश्रम में पहली जनवरी को जरूर आता। नए साल के पहले दिन यहां कई सालों से आ रहा हूं। इस साल दिसंबर में रिटायर हो रहा हूं। फिर पता नहीं कोलकाता में रहूंगा या और कहीं, अभी तय नहीं है। भगवान की जो इच्छा।
हां, पुरी (ओडीशा) के जगन्नाथ मंदिर में भी पहली जनवरी को पूजा चढाने आए लोगों की कई किलोमीटर लंबी लाइन थी। यह जानकारी वहां से आए फोटो को देख कर मिली। अनेक लोगों ने शिव मंदिरों में रुद्राभिषेक भी कराया। मेरे एक परिचित साल के पहले दिन रुद्राभिषेक कर इतने आनंदमग्न थे कि उसका शब्दों में बयान मुश्किल है। वे बोले- असली आनंद तो रुद्राभिषेक ही है।

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