Thursday, September 1, 2011

गणेश चतुर्थी

विनय बिहारी सिंह


गणेश चतुर्थी पर आप सबके लिए शुभकामनाएं।
आपका जीवन गणेश जी मंगलमय बनाएं।
गणेश जी विघ्न विनाशक कहे जाते हैं। किसी भी पूजा के पहले उनकी पूजा की जाती है ताकि सारा काम निर्विघ्न हो जाए। गणेश जी का सिर हाथी का है। यह प्रतीक है समृद्धि का। जहां गणेश जी हैं, वहां समृद्धि है। क्योंकि आपकी समृद्धि में कोई विघ्न नहीं डाल सकता। आपकी प्रगति में कोई विघ्न नहीं डाल सकता। गणेश जी के कान बहुत बड़े-बड़े हैं। यानी वे सूक्ष्मतम ध्वनियां भी सुन सकते हैं। उनका पेट बड़ा है। यानी उनके भक्त धन- धान्य से पूर्ण होते हैं। उनकी सवारी चूहा है। यह भी प्रतीक है। चूहे की गति बहुत तेज होती है। वह किसी भी तरह के जाल को काट सकता है। हमारे जीवन के जालों को भी गणेश जी का चूहा काट देता है। एक बार भगवान शिव ने अपने दोनों बेटों गणेश जी और कार्तिक से कहा कि तुम दोनों में जो पहले पृथ्वी परिक्रमा कर आएगा, वह श्रेष्ठ माना जाएगा। गणेश जी अपनी सवारी चूहे पर बैठे और अपने माता- पिता की परिक्रमा करने लगे। उधर कार्तिक अपनी सवारी मोर पर बैठे और पृथ्वी परिक्रमा पर निकल गए। गणेश जी ने कहा- मेरे लिए मेरे माता- पिता ही पूरी पृथ्वी हैं। भगवान शिव गणेश जी पर प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया कि हर पूजा के पहले गणेश जी की सबसे पहले पूजा होगी। तभी से यह परंपरा बनी कि गणेश पूजा कर ही विवाह या अन्य अनुष्ठान शुरू होते हैं। जब कार्तिक पृथ्वी परिक्रमा कर लौटे तो उन्हें इसकी जानकारी मिली। उन्होंने अपने भाई गणेश जी की भूरि- भूरि प्रशंसा की। भगवान शिव कार्तिकेय पर भी प्रसन्न हुए। उन्होंने उन्हें भी आशीर्वाद दिया कि जब तक पृथ्वी रहेगी, तुम्हारा नाम रहेगा। गणेश भगवान के जन्म के बारे में तो हम सभी जानते हैं। आइए कार्तिक के जन्म के बारे में जानें। शिव जी की तपस्या भंग करने के लिए राक्षसों ने कामदेव का सहारा लिया। राक्षसों ने कामदेव से कहा कि वह फूलों का बाण समाधि में बैठे भगवान शिव को मारे ताकि वे काम विह्वल हो जाएं। ज्योंही कामदेव ने फूलों का बाण भगवान शिव पर चलाना चाहा, उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया। इससे कामदेव वहीं जल कर भस्म हो गया। भगवान के तीसरे नेत्र से जो तेज निकला था, उसे और कोई तो संभाल नहीं सकता था। इसलिए भगवान ने उसे अग्नि को सौंप दिया। अग्नि माता भी उसे संभाल नहीं पाईं। इसलिए उन्होंने इस तेज को पास के एक तालाब में डाल दिया। कहते हैं माता पार्वती स्वयं तालाब बन कर वहां उपस्थित थीं। वे जानती थीं, भगवान का तेज और कोई अपने पास रख ही नहीं सकता। इसी तेज से कार्तिक का जन्म हुआ।
विघ्नविनाशक, गणपति, सिद्धिदायक भगवान गणेश हम सबका जीवन शुभ घटनाओं से भर दें। यही कामना है।

4 comments:

वन्दना said...

विघ्नहर्ता विघ्न हरो
मेटो सकल क्लेश
जन जन जीवन मे करो
ज्योति बन प्रवेश
ज्योति बन प्रवेश
करो बुद्धि जागृत
सबके साथ हिलमिल रहें
देश दुनिया के नागरिक

श्री गणेशाय नम:……गणेश जी का आगमन हर घर मे शुभ हो।

Anonymous said...

Happy Ganesh Chaturthi..

महेन्द्र मिश्र said...

गणेश उत्सव पर्व के अवसर पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं.....

Shah Nawaz said...

गणेश उत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएँ!