Friday, September 2, 2011

प्रदूषण से देश के लोगों के फेफड़ों पर असर

विनय बिहारी सिंह



आज अंग्रेजी दैनिक- द टेलीग्राफ में लीड समाचार है कि भारतीय लोगों के फेफड़े दुनिया के चार महाद्वीपों में सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसकी वजह है प्रदूषण। हमारे देश में प्रदूषण नियंत्रण पर सख्ती बरतने का समय अब आ गया है। जिन- जिन वजहों से घातक धुएं से हमारा वायुमंडल जहरीला हो रहा है, उस पर लगाम कसी जानी चाहिए। इस रिपोर्ट की शुरूआती पंक्तियां आप भी पढ़ें-

World’s worst lungs are in India
- Cross-continental survey raises deeper air pollution fears than suspected

G.S. MUDUR

New Delhi, Sept. 1: Indians have the poorest lungs among 17 populations across four continents, according to new research that has stirred speculation that the health effects of air pollution in India may be worse than hitherto suspected.

An international study that investigated the lung functions of healthy, non-smoking adults from 17 countries has found that the efficiency of breathing of South Asians, mainly Indians, is 30 per cent lower than that of Europeans and North Americans.

This difference in lung function is much larger than previous estimates from earlier studies that compared South Asian Indians to Caucasians and cannot be explained by differences in weight, height, and urban or rural living.

कई बीमारियां तो पीने के पानी से भी होती हैं। हम जो पानी पीते हैं वह कितना साफ है, इसकी जांच करने वाली कोई एजंसी नहीं है। अगर है तो आम आदमी इसे जानता नहीं है। कम से कम हर जिले में एक ऐसी प्रयोगशाला या जांच इकाई होनी चाहिए ताकि लोग जान सकें कि जो पानी वे पी रहे हैं वह कैसा है। शहरों में तो हम लोग एक्वागार्ड या रिवर्स आस्मोसिस से शुद्ध हुआ पानी पीते हैं। लेकिन शहरों में भी सबके पास यह सुविधा नहीं है। एक उपाय उबाल कर पानी पीने का है। यह भी सभी लोग नहीं कर पाते। कुल आलस्य में तो कुछ मजबूरी में। बहरहाल प्रदूषण चाहे हवा में हो या पानी में, इस पर सजग होना बहुत जरूरी है।
प्रदूषण का असर हमारे खाद्य पदार्थों पर भी पड़ता ही है।

1 comment:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।