Saturday, January 1, 2011

आप सबके लिए नया साल मंगलमय हो


विनय बिहारी सिंह

आप सबको नया साल मंगलमय हो। इस साल आपकी ढेर सारी अच्छी कामनाएं पूरी हों। खुशियों के मौके बार- बार आएं और ईश्वर की कृपा बरसे। कल की रात मैंने अपने गुरु परमहंस योगानंद जी के आश्रम में बिताई। यानी नया साल वहीं मनाया। हम लोगों ने ३१ दिसंबर की रात १० बजे से ध्यान शुरू किया और एक जनवरी २०११ के प्रारंभ में खत्म किया। या रात बारह बजे के बाद तक ध्यान चला। फिर हम सोने चले गए। सुबह उठ कर ध्यान और सुस्वादु और पौष्टिक जलपान। आज पूरे दिन लग रहा है कि यह ईश्वर की ही कृपा है कि नए साल का पहला दिन उन्हें याद करते हुए बीत रहा है। यह भी महसूस हो रहा है कि ईश्वर के बिना जीवन कितना सूना रहता। कितना उबाऊ रहता। अगर हम अपने जीवन में ईश्वर की उपस्थिति और उनकी कृपा महसूस करते हैं तो अत्यंत भाग्यशाली हैं। क्योंकि सारा आनंद, सारा सुख ईश्वर में ही है। शारीरिक सुख, ईश्वरीय सुख के सामने फीके जान पड़ते हैं। हमें लगता है कि अच्छा वस्त्र पहन कर, मनपसंद स्वादिष्ट भोजन कर और अलग- अलग जगहों पर घूम कर आनंद मना सकते हैं। यह बुरा नहीं है। लेकिन अगर अच्छा वस्त्र पहन कर, स्वादिष्ठ भोजन कर, ईश्वरीय रस में डूबें तो यह आनंद अनंत गुना बढ़ जाता है। साधु इसे राम रस कहते हैं। वे सारा आनंद ईश्वर को समर्पित करते हुए कहते हैं- आनंद की यह धारा तो आप ही के यहां से आ रही है। तो इस आनंद में मैं कुछ और आनंद जोड़ कर, हे भगवन, मैं आपको दे रहा हूं। तब भगवान कहते हैं- ठीक है, तो यह लो इससे भी दस गुना आनंद। तब भक्त कहता है- इसे भी मैं आपको सौंपता हूं। भक्त उसमें अपना आनंद जोड़ कर भगवान को दे देता है। भगवान फिर उसका दस गुना आनंद दे देते हैं। भक्त और भगवान का यह आनंद रस का खेल चलता रहता है। इसमें दोनों को आनंद रहता है। भगवान को भी और भक्त को भी। और जब आप नींद में होते हैं या गहरे ध्यान में होते हैं तो यह पता नहीं चलता कि आप नए साल में हैं या पुराने साल में। वहां समय की सीमा रेखा खत्म हो जाती है। यह भी भगवान की लीला ही तो है।

1 comment:

वन्दना said...

नव वर्ष की आपको और आपके पूरे परिवार को हार्दिक शुभकामनायें