Saturday, January 22, 2011

भक्ति की धारा सूखे नहीं


विनय बिहारी सिंह


कुछ लोगों की शिकायत रहती है कि उन्होंने भगवान के प्रति भक्ति तो बड़े जोर- शोर से की। लेकिन बाद में यह उत्साह कम हो गया। ऐसा इसलिए होता है कि इन लोगों के भीतर भगवान की सर्वव्यापकता का बोध अचानक खत्म हो जाता है। मन में आ जाता है कि पता नहीं भगवान हैं या नहीं और मेरी प्रार्थना सुन भी रहे हैं या नहीं। बस, यह शंका ही भक्ति के पथ की बाधा है। अरे भाई, भगवान तो सर्वव्यापी, सर्व शक्तिमान और सर्व ग्याता हैं। वे नित्य हैं। ऐसा नहीं कि इस पल हैं और अगले पल नहीं हैं। यह संसार ही उन्हीं का है। वे आपके एक- एक क्षण का हिसाब रख रहे हैं। बस वे चुप और शांत हैं। वे संपूर्ण ब्रह्मांड के मालिक हैं। लेकिन चुप और शांत हैं। आपको लगातार देख रहे हैं। आप अगर उनसे संपर्क करना चाहते हैं तो आप भी चुप और शांत हो कर बैठिए और अपने हृदय में उनके लिए गहरा प्रेम पैदा कीजिए। वे आपको महसूस करा देंगे कि वे हैं। वे तो तब भी आपकी देख भाल करते हैं जब आप नींद में होते हैं। आपको अपने शरीर का कोई होश नहीं रहता, लेकिन भगवान आपकी सांसों की देखभाल करते हैं। हालांकि आप नहीं जानते कि आप सोने के बाद अगली सुबह जीवित उठेंगे या नहीं। लेकिन भगवान के पास सारे जीवों का हिसाब है। वे सदा जाग्रत, चौकस और सबका भरण- पोषण कर रहे हैं। लेकिन उनके भीतर तनिक भी अहंकार नहीं है। उनके भीतर बस प्रेम ही प्रेम है। आप भी प्रेम की पेंगे बढ़ाइए और उनसे संपर्क कर लीजिए। हां, अहंकार से आपको दूर रहना पड़ेगा। भगवान उसी को प्रेम करते हैं जो अहंकार शून्य हो। आप उनके प्रति प्रेम से लबालब होइए तो वे आपको अनंत प्रेम के सागर में ले जाएंगे। आप निहाल हो जाएंगे।

1 comment:

वन्दना said...

वाह वाह सत्य वचन्……………बहुत बढिया कहा यही तो सच है।