Monday, January 3, 2011

राजा ने कहा कि ओउम शब्द कहां है?


विनय बिहारी सिंह


एक राजा को तर्क करने का शौक था। वह रोज शिव मंदिर में जाता था। भगवान शिव की विधिवत पूजा करता था। इसके बाद जलपान और राज्य का कामकाज। एक दिन उसने मंदिर के पुजारी से पूछा कि ओउम क्या है। पुजारी ने बताया कि ओउम इस सृष्टि की सबसे पवित्र ध्वनि है। यह ईश्वर वाचक है। यानी ईश्वर के यहां से आता है। राजा ने पूछा कि तो यह सुनाई क्यों नहीं देता? पुजारी ने कहा- सुनाई तब देगा जब आप नीरव वातावरण में अत्यंत शांत मन से बैठेंगे। राजा के लिए तो कुछ भी असंभव नहीं था। वह तुरंत एकांत स्थल पर स्थित अपने आराम घर में पहुंचा। लेकिन उसे ओउम ध्वनि सुनाई नहीं पड़ी। उसने पुजारी को वहीं बुला लिया। उसकी जगह थोड़े दिनों के लिए मंदिर में एक अन्य पुजारी को तैनात किया गया। राजा ने पुजारी से पूछा- मुझे ओउम शब्द क्यों नहीं सुनाई पड़ा? पुजारी ने कहा- आपका मन शांत नहीं था प्रभु। राजा थोड़ी देर तक सोचता रहा। फिर बोला- आप ठीक कह रहे हैं। मेरा मन राज्य की बातों में उलझा रहा। लेकिन आज रात फिर मैं मन को शांत रखने की कोशिश करूंगा। राजा ने सचमुच कोशिश की। वह फिर असफल रहा। पुजारी ने कहा- महाराज, आपका मन जब तक पूरी तरह शांत नहीं होगा, आप यह पवित्र ध्वनि सुन नहीं सकते। आप अपने राजमहल में लौट चलें। वहां एक एकांत कमरे में इसका अभ्यास करें। इससे आप राज काज भी देख सकेंगे और गहरा ध्यान भी कर सकेंगे। तब आपका मन राज्य के कामों में नहीं भटकेगा। राजा ने पुरोहित की बात मान ली। राजा ने राजमहल में आकर एक एकांत कमरा चुना और हर रात कुछ घंटे वहीं ध्यान करने लगा। लेकिन फिर वह सफल नहीं हुआ। तब पुजारी ने कहा- महाराज, अपने राज्य में एक बहुत बड़े सन्यासी हैं। वे आपको ध्यान करने की विधि बताएंगे। सन्यासी को बुलाया गया। सन्यासी राजा की समस्या सुन कर हंसे और बोले- जब तक आपको यह महसूस होगा कि आप राजा हैं, आपको ओउम ध्वनि नहीं सुनाई देगी। लेकिन जब आप यह समझेंगे कि आप ईश्वर के अंश हैं तो आप सफल हो जाएंगे। अपने अस्तित्व का भगवान में लय कर दीजिए। इसके लिए बार- बार कोशिश करनी पड़ेगी। एक दिन अचानक आप इसका रहस्य जान जाएंगे। राजा ने वैसा ही किया। एक दिन पुजारी ने पूछा- महाराज। आजकल आप बहुत प्रसन्न हैं। क्या आपने भगवान से संपर्क कर लिया? राजा ने कहा- ईश्वर अव्यक्त हैं। लेकिन महसूस किए जा सकते हैं। लेकिन इस महसूस करने का वर्ण शब्दों में नहीं किया जा सकता। वे शब्दों की व्याख्या से परे हैं।

2 comments:

वन्दना said...

सही तो कहा राजा ने सिर्फ़ महसूस ही किया जा सकता है अव्यक्त को…………सुन्दर प्रस्तुति।

वन्दना said...

दोस्तों
आपनी पोस्ट सोमवार(10-1-2011) के चर्चामंच पर देखिये ..........कल वक्त नहीं मिलेगा इसलिए आज ही बता रही हूँ ...........सोमवार को चर्चामंच पर आकर अपने विचारों से अवगत कराएँगे तो हार्दिक ख़ुशी होगी और हमारा हौसला भी बढेगा.
http://charchamanch.uchcharan.com