Wednesday, October 7, 2009

माता ज्वाला देवी का दर्शन



विनय बिहारी सिंह


शिमला से सात घंटे की कार यात्रा के बाद हम लोग माता ज्वाला देवी के मंदिर पहुंचे। यह मंदिर कांगड़ा जिले में पड़ता है। ज्वाला देवी माता पार्वती को ही कहते हैं। जब पार्वती जी ने अपने पति शिवजी को मैके में हो रहे विशाल यग्य में न बुलाए जाने से दुखी होकर खुद को अग्नि में भस्म कर दिया तो भगवान शिव वहां पहुंचे और अपनी पत्नी का शरीर फिर से प्रकट किया। वे उस मृत शरीर को उठा कर क्रोध में चल पड़े। देवता डर गए कि अब तो ब्रह्मांड की खैर नहीं है। तब परम पिता ने ब्रह्मांड की रक्षा के लिए माता पार्वती के विभिन्न अंगों को विभिन्न जगहों पर गिरा दिया ताकि अंत में जब भगवान शंकर शरीर को उतारें तो पाएं कि वहां तो कुछ भी नहीं है। इस तरह परम पिता की यह लीला समझ कर उनका क्रोध शांत हो जाएगा। मान्यता है कि यहां माता की जीभ गिरी थी। जीभ गिरते ही ज्वाला में तब्दील हो गई। यही ज्वाला आज तक जल रही है। कहा जाता है कि यहां बादशाह अकबर ने सोने का छत्र चढ़ाया। छत्र चढ़ाने के बाद उसके मन में अहंकार आ गया। अहंकार आते ही वह छत्र ऐसे धातु में बदल गया जिसकी कोई कीमत नहीं है। आज तक न जाने कितने वैग्यानिकों ने इस धातु का परीक्षण किया लेकिन उसे कोई नाम नहीं दे पाए। कुछ लोग कहते हैं कि उसमें लगभग सभी धातुओं का मिश्रण है। मैंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा मंदिर देखा जहां किसी मूर्ति की नहीं, साक्षात ज्योति की पूजा होती है। हजारों साल से जल रही दो ज्योतियों की हजारों लोग रोज पूजा करते हैं। हमेशा लंबी लाइन लगी रहती है। बाहर आया तो किसी ने कहा कि यह ज्योति कोई ज्वलंत गैस हो सकती है। लेकिन वहां लोगों ने बताया कि गैस का पता लगाने के लिए विदेशों से न जाने कितने वैग्यानिक आए और निराश हो कर चले गए। सारी खोज बीन बेकार साबित हुई। अगर यह गैस भी हो तो उसे महा शक्ति ही तो कहेंगे। महाशक्ति का अनोखा रूप है यह। इसे हम देवी मानते हैं तो ठीक ही है। देवी अनंत शक्ति की प्रतीक हैं। ज्वाला देवी के दर्शन के बाद पूरा दिन बहुत आनंद में बीता। रात एक बजे सोए। बार- बार वह ज्योति आंखों के सामने आ जाती। आज भी आ जाती है। ज्योति के दर्शन के बाद मन में आया कि अग्नि से हम खाना पकाते हैं। पेट की अग्नि उसे पचाती है और हमारा शरीर पुष्ट होता है। फिर जब हमारी मृत्यु होती है तो यही अग्नि हमारे शरीर को चिता पर जला कर पंच तत्व में विलीन कर देती है। मां ज्वाला हमारे अंतः का शुद्धिकरण करें और हमें इस योग्य बनाएं कि हम ईश्वर दर्शन कर सकें।

1 comment:

vijay khurana said...

Maa ki shakti aparrampar ha