Friday, December 24, 2010

ईश्वर के सच्चे पुत्र थे जीसस क्राइस्ट



विनय बिहारी सिंह

जीसस क्राइस्ट यानी ईसा मसीह ईश्वर को पिता के रूप में देखते और महसूस करते थे। वे कहते थे- माई फादर एंड आई आर वन ( मेरे पिता और मैं एक हैं), लेकिन उन्होंने आगे कहा- बट व्हाट माई फादर नो, आई नो नाट ( लेकिन जो ग्यान मेरे पिता के पास है, वह मेरे पास नहीं है)। निश्चय ही जीसस ईश्वर के अवतार थे। अपने जीवन के १८ वर्ष उन्होंने भारत के उच्च कोटि के ऋषियों के साथ बिताया था। उनके जीवन के इन १८ वर्षों का उल्लेख कहीं नहीं मिलता (१४ वर्ष की उम्र के बाद के वर्ष)। उन्होंने असंख्य लोगों के रोग ठीक किए, मरे हुए कुछ लोगों को जीवित किया। उनका उद्देश्य चमत्कार दिखाना नहीं था। वे लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहते थे कि ईश्वर आपके सबसे करीब हैं। सबसे प्रियतम हैं और वे सभी मनुष्यों को बहुत प्यार करते हैं। मनुष्य अपने कर्मों के कारण दुखों और परेशानियों में फंसा हुआ है। इसीलिए उन्होंने कहा- सीक ये द किंगडम आफ गॉड, रेस्ट थिंग्स विल बी एडेड अन टू यू ( पहले भगवान को पाओ, बाकी चीजें तुम्हें अपने आप मिल जाएंगी)। लेकिन मनुष्य को पहले सांसारिक वस्तुएं चाहिए। भगवान नहीं। लेकिन विडंबना यह है कि सांसारिक वस्तुएं आपको सुख नहीं दे सकतीं। और ये वस्तुएं आती कहां से हैं? भगवान के ही पास से तो आती हैं। उनकी इच्छा के बिना क्या कुछ भी संभव है? लेकिन फिर भी मनुष्य भगवान को भूल कर वस्तुओं के पीछे पागल की तरह दौड़ता रहता है। जीसस क्राइस्ट करुणा के अवतार थे। मनुष्य को कोई कुछ कटु बोल देता है तो वह उसका जवाब और कटु ढंग से देता है। लेकिन जीसस क्राइस्ट को जो लोग सूली पर चढ़ा रहे थे, उनके लिए उन्होंने कहा- गॉड फारगिव देम, फार दे नो नॉट, व्हाट दे डू। ( हे भगवान इन्हें माफ कर दें, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं)। अपनी जान लेने वालों पर इस तरह की करुणा बहुत कम देखने को मिलती है। जीसस क्राइस्ट के बारे में मैंने परमहंस योगानंद जी के माध्यम से ही जाना। उन्होंने कहा है- जीसस क्राइस्ट ने मनुष्य को ईश्वर से जुड़ना सिखाया। लेकिन उनकी लोकप्रियता से दुखी शासन ने उन्हें सूली पर चढ़ा दिया। शासन चाहता था कि लोग अंधविश्वासों में डूबे रहें। ईश्वर से भयानक रूप से डरते रहें। लेकिन जीसस क्राइस्ट ने भगवान से प्रेम करना सिखाया। उन्होंने कहा कि भगवान तो सभी जीवों को प्रेम करते हैं। उनसे भय क्यों? वे हमारे करुणामय पिता हैं। ऐसे पिता के पास जाना तो आनंद में डूबना है। लोगों महसूस किया कि उनकी बातें सच हैं। उनका सदियों से चला आ रहा भय खत्म हुआ। जीसस ने बताया कि तुम्हें अगर कोई सबसे अधिक सुरक्षा दे सकता है तो वह है- ईश्वर। तुम उन्हीं के लिए मतवाला होओ। और लोग जीसस के दीवाने हो गए।

1 comment:

वन्दना said...

बेहद उम्दा और प्रेरक आलेख्।