Wednesday, December 22, 2010

शबरी ने ३५ वर्ष इंतजार किया राम का



विनय बिहारी सिंह


शबरी की प्रबल इच्छा थी कि वह भगवान राम को अपने हाथों से खिलाए। वह दिन रात राम का आह्वान करती रहती थी। हमेशा उसके मन में एक ही बात उच्चारित होती थी- राम, राम, राम। जब वह बहुत अधिक व्याकुल होती थी तो गहरे ध्यान में बैठ जाती थी और राम को मौन संदेश भेजती थी- हे मेरे प्रियतम भगवान, आपको अपने हाथों से खिलाने की मेरी इच्छा क्या पूरी नहीं होगी? कहां छुपे हो भगवान। आओ नाथ। ऋषियों का कहना था कि ऐसे करुण संदेश पाकर भगवान राम सूक्ष्म शरीर में शबरी के पास खिंचे चले आते थे। उस समय शबरी भले ही भगवान को नहीं देखती थी, लेकिन वे उसके साथ होते थे। उस समय शबरी दिव्य आनंद में डूब जाती थी। उसे लगता था यह भगवान को प्रेम करने के कारण है। यह सच भी था। क्यंकि जब तक भगवान का स्पर्श नहीं होता, भक्त को दिव्य आनंद का अनुभव नहीं होता। लेकिन शबरी तो भगवान राम को सशरीर चाहती थी। आखिर ३५ वर्षों बाद बनवास के दौरान भगवान ने शबरी की इच्छा पूरी की। शबरी के घर में कुछ ऐसा खाने को नहीं था कि वह भगवान को दे सके। तब उसकी निगाह अपने आंगन के बेर के पेड़ पर गई। बेर पके हुए फलों से लदा था। शबरी ने तुरंत चुने हुए फल तोड़े और एक टोकरी में रखा। फिर राम को पास बिठा कर बेर चख चख कर उन्हें देती। भगवान राम वही जूठे बेर खाते। लेकिन शबरी को इसका होश नहीं था कि वह जूठे बेर खिला रही है। वह तो भगवान के प्रेम में सराबोर थी। और भगवान राम भी बेर खाते रहे। यह वह क्षण था जब भगवान और भक्त एक हो गए थे। प्रेम की धारा बह रही थी। आनंद का उत्कर्ष था। किसको खबर कि बेर जूठे थे या नहीं। भक्त और भगवान का संबंध अनूठा ही है। भक्त के बिना भगवान को अच्छा नहीं लगता और भगवान के बिना भक्त छटपटाता रहता है। कुछ लोग भगवान को पिता के रूप में तो कुछ लोग मां के रूप में देखते हैं। कुछ तो भगवान को वात्सल्य भाव में देखते हैं।कुछ महिलाएं बाल गोपाल को पूजती हैं- पुत्र भाव में। चाहे किसी भाव में पूजें बस अपने हृदय को भक्ति में गहरे डुबो दें तो भगवान से रहा नहीं जाएगा। वे भक्त के वश में आ जाते हैं।

3 comments:

वन्दना said...

yahi to prem ki parakashtha hoti hai.

vishal said...

Wah saab bhakt aur bhagwan kab 1 ho jaate hain. Bada hee anuthe prayog se parichit karaya. Sadhuwaad. Aatmik sukun milata hai aapake blog par. Ishwar aapako taaumra swasth rakhe aur aapake aadhyatmik gyan men utarottar vradhi ho. Hari Om

वन्दना said...

आपकी अति उत्तम रचना कल के साप्ताहिक चर्चा मंच पर सुशोभित हो रही है । कल (27-12-20210) के चर्चा मंच पर आकर अपने विचारों से अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.uchcharan.com