Thursday, October 18, 2012

दुर्गा शप्तसती




विनय बिहारी सिंह



दुर्गा शप्तसती में मार्कंडेय पुराण के १३ अध्यायों के ७०० श्लोक हैं। इसमें मां दुर्गा के महत्व को रेखांकित किया गया है। मां दुर्गा किस तरह संकट, विघ्न और चिंताओं को दूर करती हैं और किस तरह उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है, यह समय समय पर अनेक संतों ने बताया है। ऋषि मार्कंडेय ने मां दुर्गा को विभिन्न आयामों में व्याख्यायित किया है। दुर्गा शप्तसती का पाठ बहुत विधि- विधान के साथ करना होता है। इसका एक अंश यहां दिया जा रहा है-

मार्कण्डेय उवाच 

ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम् ।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह ।। १।।

ब्रह्मोवाच
अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम् ।
देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने ।। २।।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।। ३।।

पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।
सप्तमं कालरात्रिति महागौरीति चाष्टमम् ।। ४।।

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।। ५।।

अग्निना दह्यमानास्तु शत्रुमध्यगता रणे ।
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः ।। ६।

न तेषां जायते किञ्चिदशुभं रणसङ्कटे ।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि ।। ७।।

यह सिर्फ एक संक्षिप्त अंश भर है ।सिर्फ आपको बताने के लिए। इसके आगे और पीछे कई श्लोक हैं और शुद्धि संबंधी कई विधि विधान हैं।  कृपया इसका इस्तेमाल न करें।  दुर्गा शप्तसती का प्रभाव इसके पढ़ने से ही समझ में आता है। इसमें जो ताकत है, उसे इसे समझने वाला ही जान सकता है।

1 comment:

Madan Mohan Saxena said...

बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.