Friday, November 14, 2008
भगवन्नाम के अमर प्रचारक चैतन्य महाप्रभु
श्रीकृष्ण चैतन्यदेवका पृथ्वी पर अवतरण विक्रम संवत् 1542(सन् 1486ई.) के फाल्गुन मास की पूíणमा को संध्याकाल में चन्द्र-ग्रहण के समय सिंह-लग्न में बंगाल के नवद्वीपनामक ग्राम में भगवन्नाम-संकीर्तनकी महिमा स्थापित करने के लिए हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित जगन्नाथ तथा माता का नाम शची देवी था।
पतितपावनीगंगा के तट पर स्थित नवद्वीपमें श्रीचैतन्यमहाप्रभु के जन्म के समय चन्द्रमा को ग्रहण लगने के कारण बहुत से लोग शुद्धि की कामना से श्रीहरिका नाम लेते हुए गंगा-स्नान करने जा रहे थे। पण्डितों ने जन्मकुण्डली के ग्रहों की समीक्षा तथा जन्म के समय उपस्थित उपर्युक्त शकुन का फलादेश करते हुए यह भविष्यवाणी की-इस बालक ने जन्म लेते ही सबसे श्रीहरिनामका कीर्तन कराया है अत:यह स्वयं अतुलनीय भगवन्नाम-प्रचारकहोगा।
वैष्णव इन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार मानते हैं। प्राचीन ग्रंथों में इस संदर्भ में कुछ शास्त्रीय प्रमाण भी उपलब्ध होते हैं। देवीपुराण-भगवन्नामही सब कुछ है। इस सिद्धांत को प्रकाशित करने के लिए श्रीकृष्ण भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य नाम से प्रकट होंगे। गंगा के किनारे नवद्वीपग्राम में वे ब्राह्मण के घर में जन्म लेंगे। जीवों के कल्याणार्थ भक्ति-योग को प्रकाशित करने हेतु स्वयं श्रीकृष्ण ही संन्यासी वेश में श्रीचैतन्य नाम से अवतरित होंगे। गरुडपुराण-कलियुग के प्रथम चरण में श्रीजगन्नाथजीके समीप भगवान श्रीकृष्ण गौर-रूप में गंगाजीके किनारे परम दयालु कीर्तन करने वाले गौराङ्ग नाम से प्रकट होंगे। मत्स्यपुराण-कलियुगमें गंगाजीके तट पर श्रीहरिदयालु कीर्तनशीलगौर-रूप धारण करेंगे। ब्रह्मयामल-कलियुग की शुरुआत में हरिनाम का प्रचार करने के लिए जनार्दन शची देवी के गर्भ से नवद्वीपमें प्रकट होंगे। वस्तुत:जीवों की मुक्ति और भगवन्नामके प्रसार हेतु श्रीकृष्ण का ही चैतन्य नाम से आविर्भाव होगा।
विक्रम संवत् 1566में मात्र 24वर्ष की अवस्था में श्रीचैतन्यमहाप्रभु ने गृहस्थाश्रम का त्याग करके संन्यास ले लिया। इनके गुरु का नाम श्रीकेशवभारती था। संन्यास लेने के उपरान्त श्रीगौरांग(श्रीचैतन्य)महाप्रभु जब पुरी पहुंचे तो वहां जगन्नाथजीका दर्शन करके वे इतना आत्मविभोर हो गए कि प्रेम में उन्मत्त होकर नृत्य व कीर्तन करते हुए मन्दिर में मूíच्छत हो गए। संयोगवश वहां प्रकाण्ड पण्डित सार्वभौम भट्टाचार्य उपस्थित थे। वे महाप्रभु की अपूर्व प्रेम-भक्ति से प्रभावित होकर उन्हें अपने घर ले गए। वहां शास्त्र-चर्चा होने पर जब सार्वभौम अपने पाण्डित्य का प्रदर्शन करने लगे, तब श्रीगौरने ज्ञान के ऊपर भक्ति की महत्ता स्थापित करके उन्हें अपने षड्भुजरूपका दर्शन कराया। सार्वभौम गौरांग महाप्रभु के शिष्य हो गए और वह अन्त समय तक उनके साथ रहे। पंडित सार्वभौम भट्टाचार्य ने जिन 100श्लोकों से श्रीगौरकी स्तुति की थी, वह रचना चैतन्यशतक नाम से विख्यात है।
विक्रम संवत् 1572(सन् 1515ई.) में विजयादशमी के दिन चैतन्य महाप्रभु ने श्रीवृन्दावनधामके निमित्त पुरी से प्रस्थान किया। श्रीगौरांगसडक को छोडकर निर्जन वन के मार्ग से चले। हिंसक पशुओं से भरे जंगल में महाप्रभु श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए निर्भय होकर जा रहे थे। पशु-पक्षी प्रभु के नाम-संकीर्तन से उन्मत्त होकर उनके साथ ही नृत्य करने लगते थे। एक बार श्रीचैतन्यदेवका पैर रास्ते में सोते हुए बाघ पर पड गया। महाप्रभु ने हरे कृष्ण हरे कृष्ण नाम-मन्त्र बोला। बाघ उठकर हरे कृष्ण हरे कृष्ण कहकर नाचने लगा। एक दिन गौरांग प्रभु नदी में स्नान कर रहे थे कि मतवाले जंगली हाथियों का एक झुंड वहां आ गया। महाप्रभु ने कृष्ण-कृष्ण कहकर उन पर जल के छींटे मारे तो वे सब हाथी भी भगवन्नामबोलते हुए नृत्य करने लगे। सार्वभौम भट्टाचार्य श्रीचैतन्यदेवकी ये अलौकिक लीलाएं देखकर आश्चर्यचकित हो उठे। काíतक पूíणमा को श्रीमहाप्रभुवृन्दावन पहुंचे। वहां आज भी प्रतिवर्ष काíतक पूíणमा को श्रीचैतन्यदेवका वृन्दावन-आगमनोत्सव मनाया जाता है। वृन्दावन के माहात्म्य को उजागर करने तथा इस परमपावनतीर्थ को उसके वर्तमान स्वरूप तक ले जाने का बहुत कुछ श्रेय श्रीचैतन्यमहाप्रभु के शिष्यों को ही जाता है।
एक बार श्रीअद्वैतप्रभुके अनुरोध पर श्रीगौरांगमहाप्रभु ने उन्हें अपने उस महामहिमामयविश्वरूप का दर्शन कराया, जिसे द्वापरयुगमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देते समय दिखाया था। श्रीनित्यानन्दप्रभुकी मनोभिलाषाथी कि उन्हें श्रीकृष्णचैतन्यदेवके परम ऐश्वर्यवान विराट स्वरूप का दर्शन प्राप्त हो। महाप्रभु ने उनको अपने अनन्त ब्रह्माण्डरूपीदिव्य रूप का साक्षात्कार करवाया। माता शचीदेवीने इनको श्रीकृष्णरूपमें देखा था। वासुदेव सार्वभौम और प्रकाशानन्दसरस्वती जैसे वेदान्ती भी इनके सत्संग से श्रीकृष्णनाम-प्रेमीबनकर भगवन्नामका संकीर्तन करने लगे। महाप्रभु की सामीप्यता से बडे-बडे दुराचारी भी सन्त हो गए। इनके स्पर्श से अनेक असाध्य रोगी ठीक हो गए। श्रीगौरांगअवतार की श्रेष्ठता के प्रतिपादक अनेक ग्रन्थ हैं। इनमें श्रीचैतन्यचरितामृत, श्रीचैतन्यभागवत, श्रीचैतन्यमंगल, अमिय निमाइचरितआदि विशेष रूप से पठनीय हैं। महाप्रभु की स्तुति में अनेक महाकाव्य भी लिखे गए हैं।
द्वापरयुगमें श्रीकृष्ण और राधा ने पृथक देह धारण करके श्रीवृन्दावनधाममें लीलाएं की थीं। एक दूसरे के सौन्दर्य-माधुर्य को बढाते हुए प्रिया-प्रियतम ने स्थावर-जंगम सबको आनन्द दिया। यह ध्यान रहे कि प्रेम के विषय श्रीकृष्ण हैं परन्तु प्रेम का आश्रय राधाजीहैं। परस्पर एकात्माहोते हुए भी वे दोनों सामान्य प्राणियों को दो भिन्न स्वरूप लगे। श्रीकृष्ण को राधा के प्रेम, अपने स्वरूप के माधुर्य तथा राधा के सुख को जानने की इच्छा हुई। श्रीकृष्ण के मन में आया कि जैसे मेरा नाम लेकर राधा भाव-विह्वल होती हैं, वैसे मैं भी अपने नाम-रस की मधुरिमा का आस्वादन करूंगा। मैं जब राधा-भाव ग्रहण करूंगा, तभी मुझे राधा के प्रेम का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सकेगा। अस्तु राधा-भाव को अंगीकार करने के लिए ही श्रीगौरांगका अवतार हुआ था।
श्रीचैतन्यमहाप्रभु ने 32अक्षरों वाले तारकब्रह्महरिनाम महामन्त्र को कलियुग में जीवात्माओं के उद्धार हेतु प्रचारित किया-
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
कलिपावनावतार, प्रेममूíत,भावनिधिश्रीगौरांगदेवके उपदेशों का सार यह है-मनुष्य को निज कुल, विद्या, रूप, जाति और धनादिके अहंकार को त्यागकर सर्वस्व समर्पण के भाव से भगवान के सुमधुर नामों का संकीर्तन करना चाहिए। अन्त:करण की शुद्धि का यह सबसे सरल व सर्वोत्तम उपाय है। भक्त कीर्तन करते समय भगवत्प्रेममें इतना मग्न हो जाएं कि उसके नेत्रों से प्रेमाश्रुओंकी धारा बहने लगे, उसकी वाणी गदगद और शरीर पुलकित हो जाए। भगवन्नामके उच्चारण में देश-काल का कोई बंधन नहीं है। भगवान ने अपनी संपूर्ण शक्ति और अपना सारा माधुर्य अपने नामों में भर दिया है। भगवान का नाम स्वयं भगवान के ही तुल्य है। नाम, विग्रह, स्वरूप-तीनों एक हैं, अत:इनमें भेद न करें। नाम नामी को खींच लाता है। कलियुग में मुक्ति भगवन्नामके जप से प्राप्त होगी।
डा. अतुल टण्डन
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
1 comment:
香港女星寫真,a片分享,美女色情裸體,台灣kiss情色貼圖,美腿圖,正妹,日本情色網,情色卡通下載,免費下載的做愛照片,線上a片免費看,tube影片,情色成人,ro 私服論壇,色情網,aaa片免費看短片分享區,日本人妻熟女自拍貼圖,蕃薯論壇,台灣網友自拍貼照,嘟嘟成人網,狂插漂亮美眉,8591論壇,女同志聊天室,人妻俱樂部網站,背包客棧論壇,成人性感內衣,看美女脫光光,黑澀會美眉無名,
色咪咪貼影片,無碼a片,aa片免費看,免費線上觀看a片,做愛的圖片,色情漫畫,性感卡通美女圖片,香港a片,自拍,情色圖書館,plus 28 論壇,1007視訊,熟女自拍照,苗栗人聊天室,黑澀會美眉即時通,jp成人,色情,aaaaa片俱樂部,情侶歡愉用品,
okav成人影院,網友裸體自拍,交友ukiss,娘家影片,a片免費,黑澀會美眉即時通,人妻性交俱樂部,聊天室尋夢園,18禁,情色性感美女圖片,美女短片免費試看,3級女星寫真,情色短片論壇,摯愛中年聊天室,美腿貼圖,影音聊天,聊天室找一夜,g世代論壇,
Post a Comment