Saturday, September 7, 2013

जीवन की गति न्यारी



      मित्रों, काफी दिनों तक अपने ब्लाग से अलग रहा। लेकिन दुबारा यह अपने पास खींच ही लाया। इस बीच कई नए अनुभव  प्राप्त हुए। उनकी चर्चा फिर कभी। आज भगवत गीता पढ़ रहा था। भगवान कृष्ण ने कितनी सुंदर बातें कहीं हैं इस पवित्र पुस्तक में। भगवान ने कहा है- मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता। कैसा भक्त? जो अनन्य भक्ति करता हो। यानी उसकी हर गतिविधि में भगवान का स्मरण हो। ईश्वर ही जिसके आधार हों, वह व्यक्ति कभी नष्ट नहीं होता। भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं। पढ़ कर अच्छा लगा। एक औऱ प्रसंग है- भगवान कहते हैं कि जो सुख औऱ दुख में, सर्दी और गर्मी में, मान और अपमान में सम हो वह  मेरा अत्यंत प्रिय है। जो भय, घृणा या कामना से रहित हो गया हो वह मेरा अत्यंत प्रिय है। भगवत गीता तो हमें रोज ही पढ़नी चाहिए।

Saturday, July 6, 2013

कब्ज कैसे दूर करें





कब्ज हमेशा से मनुष्य के लिए परेशानी का कारण रहा है। लेकिन इसे तोड़ने का एक उपाय पा कर मुझे बहुत खुशी हो रही है। क्या करें कि कब्ज टूटे?  या कब्ज ही न हो।
   योगदा सत्संग सोसाइटी आफ इंडिया के संस्थापक और मेरे गुरुदेव परमहंस योगानंद जी का फार्मूला अत्यंत कारगर है। फलों पर या बिना चीनी के फलों के रस पर एक दिन उपवास करें। सुबह औऱ शाम एक या दो चम्मच इसबगोल की भूसी पानी में घोल कर पी लें। यह सप्ताह में सिर्फ एक ही दिन करना है। अन्यथा इसबगोल के भूसी की आदत पड़ जाएगी। सिर्फ एक दिन। इससे आदत भी नहीं पड़ेगी और पेट भी अच्छी तरह साफ हो जाएगा। अगले दिन हल्की सी खिचड़ी खाएं। तो मन प्रसन्न रहेगा। कई लोग उपवास के अगले दिन गरिष्ठ भोजन कर लेते हैं क्योंकि उन्हें काफी भूख लगी होती है।  लेकिन थोड़ा सा संयम बरत कर खिचड़ी खाने वाले दिन के अगले दिन से सामान्य भोजन शुरू करें तो काफी फायदा होता है। इसे आप आजमा कर देख सकते हैं। निश्चित फायदा होगा। हां, उपवास के दौरान पर्याप्त पानी पीने से और ज्यादा लाभ होगा।

Tuesday, July 2, 2013

संगीत का ककहरा


मित्रों, पिछले दिनों एक बहन ने अपने घर ले जाकर मुझे हारमोनियम बजाने की शिक्षा दी। अभी तो बस एक ही दिन शिक्षा ली है। लेकिन यह अचानक हुआ। उस बहन ने खुद आ कर मुझसे कहा कि चलिए मैं आपकों हारमोनियम सिखा देती हूं। ईश्वर की असीम अनुकंपा। उस बहन का नाम है- पिऊ घोष भौमिक। पहले दिन मैंने सा रे ग म प ध नी सा का अभ्यास किया। हारमोनियम के स्ट्रिंग्स पर हाथ आजमाया। मैंने पाया कि सा रे ग म  इत्यादि गाते वक्त जो संतुलन चाहिए वह मुझमें नहीं था। लेकिन सिखाने वाली बहन ने मुझे वह संतुलन सिखा दिया। तब लगा कि यह तो एक और क्षेत्र है जिसके बारे मैं बिल्कुल नहीं जानता था। एक नया संसार।  ठीक इसी तरह जीवन में भी एक सकारात्मक लय की जरूरत है। वह लय तभी आ सकती है जब ईश्वर के प्रति उत्सुकता हो। ईश्वर, ईश्वर औऱ ईश्वर।

Thursday, June 6, 2013

आपने सोचा और वो उड़ा हेलिकॉप्टर...

COURTESY-   BBC  Hindi

 


ये हेलिकॉप्टर इंसान के दिमाग से आने वाली कमांड पर चलेगा
शोधकर्ताओं ने सोच की शक्ति का ऐसा इस्तेमाल कर दिखाया है कि हेलिकॉप्टर के नियंत्रण के लिए मस्तिष्क का इस्तेमाल  रिमोट-कंट्रोल के तौर पर किया जा सकेगा.
दुनिया भर में शोधकर्ता सोच की शक्ति को इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदलने की कोशिश में लगे हैं और इस आविष्कार के साथ उन कोशिशों में एक नया अध्याय जुड़ गया है.
काल्पनिक और वास्तविक दुनिया के बीच अब एक नायाब रिश्ता जुड़ गया है, जिसके बारे में कुछ वर्षों पहले सोचा भी नहीं जा सकता था. इस आविष्कार का मकसद है मानसिक रूप से कमज़ोर लोगों की मदद करना और साथ ही वीडियो गेम खेलने के नायाब तरीके इजाद करना.
इस शोध में दिमाग की विद्युत किरणों को कैद किया गया.
हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि ये उपकरण खुद-ब-खुद ही जान सकता है कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है.
बल्कि इसके लिए एक  इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को तैयार किया जाता है जिसे दिमाग की विद्युत किरणों का स्वरूप पढ़ने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.
इस उपकरण की मदद से इंसान के दिमाग में चल रही सोच को हेलिकॉप्टर के साथ जोड़ा जाता है.

दिमागी कंट्रोल

"हमारा मकसद है उन लोगों की या मरीज़ों की मदद करना जो चल-फिर नहीं पाते हैं. इस तकनीक के ज़रिए हम व्हीलचेयर को कंट्रोल करना चाहते हैं, टीवी को नियंत्रित करना चाहते हैं और साथ ही अगर हो सके तो शरीर के किसी कृत्रिम अंग का संचालन भी इस तकनीक के ज़रिए करना चाहते हैं ---- "प्रॉफेसर बिन हे, मुख्य आविष्कारक

इस प्रक्रिया के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रतीत होने वाला ग्राफ़ अजब ही लगता है, लेकिन ये तकनीक प्रभावशाली साबित हुई है.
इससे पहले ऐसी तकनीक का इस्तेमाल व्हीलचेयर को चलाने और ‘दिमागी ऑरकेस्ट्रा’ चलाने के लिए भी हो चुका है.
इस शोध में दिमाग की विद्युत किरणों को कैद किया गया है
तकनीक से जुड़ी कंपनियों को भी इस प्रयोग में कई संभावनाएं दिखाई देती हैं.
खबरों के मुताबिक सैमसंग भी ‘ दिमागी कंट्रोल’ तकनीक का इस्तेमाल करने वाली एक टैबलेट डिवाइस पर काम कर रहा है.
अब जब शोधकर्ता दिमाग के भीतर तक तकनीक का इस्तेमाल कर पहुंच सकते हैं, तो अब वे अपना ध्यान और ज़्यादा सूक्ष्म विषयों पर केंद्रित कर सकते हैं.
इस शोध के वरिष्ठ आविष्कारक बिन हे का कहना है कि उनकी टीम इस प्रयोग पर काफी समय से काम कर रही थी.
प्रॉफेसर बिन हे ने बीबीसी को बताया, “हमारा मकसद है उन लोगों की या मरीज़ों की मदद करना जो चल-फिर नहीं पाते हैं. इस तकनीक के ज़रिए हम व्हीलचेयर को कंट्रोल करना चाहते हैं, टीवी को नियंत्रित करना चाहते हैं और साथ ही अगर हो सके तो शरीर के किसी कृत्रिम अंग का संचालन भी इस तकनीक के ज़रिए करना चाहते हैं.”
इस प्रयोग के लिए पांच लोगों को चुना गया और उन्हें एक साधारण टोपी पहनाई गई जिसमें 64 इलेक्ट्रोड लगे थे.
इन इलेक्ट्रोड्स के ज़रिए कंप्यूटर को दिमाग में होने वाली हलचल के बारे में बताया जाता है, और फिर वाई-फाई की मदद से कंप्यूटर कमांड देता है जिससे हेलिकॉप्टर चलता है.
इंसान की दिमागी कमांड का पालन करते हुए ये हेलिकॉप्टर अपने सामने आने वाली रुकावटों को भी झांसा दे सकता है. इसके अलावा इस तकनीक का इस्तेमाल घर में रोबोट के संचालन के लिए भी हो सकता है.

Monday, May 27, 2013

भगवान पर विश्वास को लेकर सर्वे


एक बेहद अविश्वसनीय खबर पढ़ने को मिली। मुझे इस सर्वे पर शंका  हो रही है। आइए पहले खबर पढ़िए-

भारतीयों की धर्म में दिलचस्पी घट रही है. कई लोगों का भगवान में यक़ीन नहीं है और वो ख़ुद को धार्मिक नहीं मानते. हालांकि ख़ुद को पूरी तरह नास्तिक कहने वालों की तादाद में गिरावट आई है. ग्लोबल इंडेक्स ऑफ़ रिलीजियॉसिटी एंड अथीज़्म की ताज़ा रिपोर्ट से ये जानकारी सामने आई है.


आपने खबर पढ़ी। जहां तक मुझे पता है भारत में धर्म में दिलचस्पी बढ़ी है। लोग योग और आध्यात्मिक गतिविधियों मे ज्यादा रुचि ले रहे हैं। आप पूछेंगे कि इसका प्रमाण क्या है? आप पिछले साल की तुलना में भारत के तमाम प्रसिद्ध मंदिरों में जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का पता लगा लीजिए। आपको पता चल जाएगा कि भारत में लोगों की धर्म में दिलचस्पी घट रही है या बढ़ रही है। मुझे पक्का यकीन है कि ईश्वर की सत्ता में विश्वास रखने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है। अध्यात्म के प्रति, ध्यान (मेडिटेशन) के प्रति लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है। आप सभी ध्यान केंद्रों, संस्थानों में जा कर पता लगाइए।
  भारत गांवों का देश है। आप गांवों में जाइए। वहां सर्वे कीजिए। मुझे नहीं पता ग्लोबल इंडेक्स ऑफ़ रिलीजियॉसिटी एंड अथीज़्म के लोग भारत के गांवों में गए थे या नहीं। लेकिन मुझे इस पर कतई विश्वास नहीं हो रहा है कि भारत के लोगों की भगवान में दिलचस्पी घट रही है। भाई, इस तरह का सर्वे आपने क्यों कराया? क्या आप नास्तिकता का झंडा गाड़ना चाहते हैं? आपको कैसे लगा कि भारत में भगवान को मानने वाले कम हो रहे हैं?  अब हम किसी भी सर्वे को आंख मूंद कर स्वीकार नहीं करेंगे। एक बार खबर आती है कि चाकलेट खाने वालों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। तो कुछ दिनों बाद खबर आती है कि चाकलेट में अमुक तत्व यह रोग बढ़ाता है। कभी खबर आती है कि काफी पीने से यह फायदा होता है तो कभी खबर आती है कि काफी पीने से यह नुकसान होता है। मुझे तो लगता है कि सर्वे कराने वाले खुद कनफ्यूज हैं। समग्र भारत के विचार अचानक किसी सर्वे में पता चल जाए, यह मुझे संभव नहीं लगता। बहरहाल मुझे अपने विचार रखने की पूरी आजादी है। और मैं किसी हालत मे इस सर्वे को मान नहीं सकता। पूरे भारत का  सर्वे इतना आसान नहीं है भाई।

Tuesday, May 21, 2013

30 सेकेंड में होगा मोबाइल चार्ज'

Courtesy- बीबीसी हिन्दी 
 अमरीका में रहने वाली भारतीय छात्रा ईशा खरे ने छोटे से आकार का एक ऐसा उपकरण बनाया है जो  मोबाइल फोन की बैटरी के अंदर फिट हो सकता है.
ईशा का दावा है कि इससे मोबाइल फोन 20-30 सेकेंड में पूरा चार्ज हो जाएगा और इसे कार की  बैटरी के लिए भी उपयोग में लाया जा सकेगा.
इसके लिए 18 वर्षीय ईशा खरे को 'इंटेल फाउंडेशन यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड' से नवाज़ा गया है और 50,000 डॉलर की स्कॉलरशिप भी दी गई है.
दुनिया की जानी-मानी कम्प्यूटर उपकरण बनाने वाली कंपनी, ‘इन्टेल’, हर साल विश्व के अलग-अलग स्कूलों से क़रीब 70 लाख बच्चों की प्रतियोगिता आयोजित करवाता है.
इनाम की घोषणा के बाद ईशा ने पत्रकारों से कहा, “मैंने तो इस उपकरण पर काम करना इसलिए शुरू किया क्योंकि मेरे मोबाइल फोन की बैटरी बहुत जल्दी ख़त्म हो जाती थी, लेकिन अब इस जीत पर यकीन करना भी मुश्किल हो रहा है.”
विजेताओं को अरिज़ोना के फीनिक्स शहर में एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया.

अब हारवर्ड की ओर

इन्टेल की प्रतियोगिता में बच्चे विज्ञान, तकनीक और गणित की दुनिया में शोध कर नए उपकरण इजाद करते हैं.
इस साल के प्रतियोगियों ने क्वांटम थ्योरी और पर्यावरण संरक्षण के तरीकों से लेकर बीमारियों के इलाज और तकनीकी उपकरण बनाने तक के प्रोजेक्ट्स पेश किए.
अपने प्रयोग में ईशा ने इस उपकरण से एक ‘एलईडी’ यानि ‘लाइट एमिटिंग डायोड’ चलाकर दिखाया. ईशा ने बताया कि उन्होंने नैनोटेकनॉलॉजी की मदद से बहुत सारी ऊर्जा अपने इस उपकरण में केन्द्रित करने की तकनीक विकसित की है जिससे चार्जिंग जैसा काम भी सेकेंड्स में हो सकता है.
फिलहाल कैलिफोर्निया के एक स्कूल में पढ़ रहीं ईशा इसी वर्ष हारवर्ड विश्वविद्यालय में नैनोकेमिस्ट्री की पढ़ाई करने जाएंगी.
लाखों छात्रों में से छांटे गए 1600 छात्रों में से चुने जाते हैं तीन विजेता जो 75,000 (पहला इनाम) और 50-50,000 डॉलर (दूसरा और तीसरा इनाम) में ले जाते हैं.
ईशा को दूसरा इनाम मिला तो पहला इनाम गया रोमानिया के 19 वर्षीय आयोनेट बुडिस्टीनो को, जिन्होंने एक सस्ती स्वचालित कार का मॉडल बनाया.

Friday, May 17, 2013

जैसे भक्त को भगवान मिल गए हों


मित्रों,  पिछले सोमवार को मैंने हुगली नदी में आए ज्वार को देखा। ज्वार उन्हीं नदियों में आता है जो  समुद्र के करीब हो और लगभग जु़ड़ी हुई हो।   हुगली समुद्र से जुड़ी हुई है। इसे ही उत्तर भारत में गंगा नदी कहते हैं। हुगली के किनारे लोग पूजा- पाठ, मुंडन और कथा आदि के अलावा पितरों को तर्पण आदि करते हैं। मैं  कोलकाता के पास बैरकपुर के धोबी घाट पर इंजन वाली नाव का इंतजार कर रहा था ताकि मैं उस पार श्रीरामपुर में अपने परमगुरु स्वामी श्री युक्तेश्वर जी (मेरे गुरु  परमहंस  योगानंद जी के गुरु) द्वारा स्थापित आश्रम में प्रणाम करने जा सकूं। आप जानते ही हैं कि परमहंस योगानंद जी की पुस्तक- आटोबायोग्राफी आफ अ योगी- विश्व की ३३ भाषाओं में अनूदित है और आज भी सर्वाधिक रोचक पुस्तकों में से एक है। हिंदी में इसका अनुवाद- योगी कथामृत- के नाम से हुआ है।
 जब मैं बैरकपुर के धोबीघाट पहुंचा तो मुझे बताया गया कि ज्वार आ रहा है, इसलिए इंजन वाली नाव का आना- जाना फिलहाल बंद कर दिया गया है। मुझे भी ज्वार देखने की उत्सुकता थी। लगभग २० मिनट बाद ज्वार आया। जीवन में पहली बार मैंने किसी नदी में ज्वार देखा। वैसे रामकृष्ण परमहंस पर लिखी उनके शिष्य श्री म की पुस्तक रामकृष्ण वचनामृत में बान (बांग्ला में ज्वार को बान कहते हैं) का जिक्र है। इसका हिंदी में अनुवाद किया है- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने।
तो ज्वार आया। भारी लहरों के साथ। लहरें छपाक से किनारे से टकरातीं। मानों नदी
के किनारे को मथ दिया। जैसे भक्त का मन भगवान के लिए मथ जाता है। जिसे गुरुदेव परमहंस योगानंद ने- चर्निंग द इथर कहा है। करीब पांच- सात मिनट के बाद ही ज्वार शांत हो गया। इंजन वाली नाव किनारे आ कर खड़ी हो गई। हम लोग पांच- सात मिनट में ही उस पार पहुंच गए और उस पवित्र स्थल और परमगुरुओं को प्रणाम किया जिसका वर्णन- आटोबायोग्राफी आफ अ योगी में भी है। लौटे तो हुगली नदी शांत थी। जैसे भक्त को भगवान मिल गए हों। वह पूर्ण तृप्त हो गया हो।